एक्टर अनुज का गोवा में होने वाला था कत्ल:नशे में लिखवाया सुसाइड नोट, 3 हत्याओं के बाद बिगड़ा एक्ट्रेस-गैंगस्टर का प्लान
बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के अरुण टिक्कू मर्डर केस में अब तक आपने पढ़ा कि 7 अप्रैल 2012 को समर्थ आंगन बिल्डिंग से निकलते हुए एक शख्स अरुण टिक्कू की हत्या होते देखता है और पुलिस को इन्फॉर्म करता है। अरुण टिक्कू की हत्या के बाद उनका बेटा एक्टर अनुज टिक्कू लापता हो जाता है, जिससे पुलिस का उन पर शक बढ़ जाता है। जब अनुज की गिरफ्तारी होती है तो वो बताते हैं कि वो दोस्त करण सूद के साथ गोवा गए थे और उनके पिता रेंटल एग्रीमेंट देखने उसी दिन दिल्ली से मुंबई आए थे। घर में रेनोवेशन चल रहा था। 2 पुताई करने आए शख्स वहां मौजूद थे, जो उनके दोस्त करण सूद के नौकर थे।
जांच में सामने आया कि जिस करण सूद को अनुज दोस्त कह रहे थे, वो असल में कुख्यात गैंगस्टर है, जिसे पहले डबल मर्डर के आरोप में उम्रकैद हुई थी।
अनुज पुलिस को बताते हैं कि करण से उनकी मुलाकात एक्ट्रेस सिमरन सूद ने करवाई थी। सिमरन से उनसे कहा था कि करण बडे़ होटेलियर हैं और उनके भाई हैं। करण और सिमरन के कहने पर वो अपना फ्लैट एक जर्मन महिला को किराए पर दे रहे थे और पिता रेंट एग्रीमेंट देखने ही मुंबई आए थे।
अरुण टिक्कू हत्याकांड के पार्ट-2 में जानिए आगे की कहानी-
डबल मर्डर केस में विजय पालांडे को उम्रकैद की सजा हुई थी, जबकि सिमरन को तब छोड़ दिया गया था। करीब 2 साल तक जेल में रहने के बाद विजय पेरोल पर बाहर आए और भाग निकले। विजय पालांडे इस मामले में भी कस्टडी से भागने की नाकाम कोशिश कर चुके थे, जिससे पुलिस ने उन्हें कड़ी निगरानी में रखी और सख्ती से पूछताछ की।
12 अप्रैल को हुई पूछताछ में विजय पालांडे ने बेहद शॉकिंग खुलासे किए, जिससे न सिर्फ अरुण टिक्कू बल्कि एक प्रोड्यूसर की गुमशुदगी के तार भी जुड़े थे।
विजय के इकबाल-ए-जुर्म के अनुसार, वो अनुज टिक्कू की प्रॉपर्टी हथियाने के बाद उनकी हत्या करना चाहता था। 2 साल पहले सिमरन ने अनुज से दोस्ती की और फिर विजय को करण सूद बताकर उससे मिलवाया। दोनों ने उन्हें अपनी रईसी की कहानियां सुनाईं और अनुज से गहरी दोस्ती कर ली।
वो जिस विदेशी महिला को अनुज का फ्लैट किराए पर दिलवा रहे थे, वो विजय की ही पत्नी थी। प्लान के अनुसार, दोनों अनुज से प्रॉपर्टी के पेपर्स साइन करवाते और फिर उनकी गोवा ले जाकर हत्या करते। लेकिन इसी बीच उन्हें पता चला कि अनुज के पिता अरुण टिक्कू उनकी अचानक बढ़ती दोस्ती पर शक करने लगे थे और रेंटल एग्रीमेंट देखना चाहते थे। विजय ये भी जान चुका था कि अरुण टिक्कू डॉक्यूमेंटेशन के पक्के हैं और उनके रहते प्रॉपर्टी ट्रांसफर करना मुश्किल है। ऐसे में विजय ने अनुज के पिता अरुण को ये कहते हुए मुंबई बुलाया कि उनके बेटे ने बिना किराए के दो लोगों को फ्लैट में ठहराया हुआ है।
विजय की बात सुनकर अरुण मुंबई आए थे। प्लान के तहते उसी रोज वो बेटे अनुज को अपने साथ गोवा ले गए और दूसरी तरफ फ्लैट में पिता की हत्या कर दी गई।
अनुज टिक्कू पिता की हत्या के बाद उसी फ्लैट में रहे थे। तब तक क्राइम सीन को जस का तस ही रखा गया था। जब अनुज को पूछताछ के बाद छोड़ा गया तो वो उसी घर में रहे और उसी कमरे में सोए जहां पिता का कत्ल हुआ था। इस पर अनुज कहते हैं-
घर में घुसते ही सब कुछ उलटा-पुलटा था। फ्रिज गिरा हुआ, मैट्रेस इधर-उधर, सोफे उलटे। बाथरूम में खून, टाइल्स टूटी हुई, दीवारों पर खून के छींटों के निशान। वो पूरा क्राइम सीन था। पुलिस ने जो लड़का मेरे साथ भेजा था, वो ये देखकर भाग गया। उसी क्राइम सीन में मैं रात को सोया।
साल 2012 में उस समय के मशहूर क्राइम रिपोर्टर विवेक अग्रवाल केस को कवर कर रहे थे। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि इस हत्याकांड के बाद अनुज की स्थिति ठीक नहीं थी। वो कहते हैं- ‘अनुज की हालत इतनी खराब थी कि वह पुलिस से भी ठीक से बात नहीं कर पा रहा था। अनुज एक बहुत ही सीधा‑सादा किस्म का लड़का था। उसकी दुनिया में दोस्त नहीं थे। वह उस तरह का इंसान नहीं था जो दो मिनट में किसी से दोस्ती कर ले। उसकी मानसिक स्थिति को आसानी से मैनिपुलेट किया जा सकता था। आप उसे स्ट्रीट‑स्मार्ट या बहुत दुनियादार भी नहीं कह सकते। यह बात उसके पिता मिस्टर टिक्कू जानते थे, हालांकि वह दिल्ली में रहते थे।’
आगे नीरज कहते हैं, ‘अनुज मुंबई एक्टिंग करने आया था, लेकिन इंडस्ट्री में उसकी नेटवर्किंग बहुत कमजोर थी। फिल्म इंडस्ट्री का उसूल है जितने ज्यादा लोग, उतनी ज्यादा संभावनाएं। यह कमी अनुज में थी, इसलिए उसे काम भी कम मिलता था।’
‘उसके पास एक नीले रंग की मर्सिडीज कार भी थी, जिसे विजय पालांडे हथियाना चाहता था। उसे यह भी पता चला कि अनुज का अंधेरी में एक 2BHK फ्लैट है, जिसकी वैल्यू उस वक्त करीब ढाई‑तीन करोड़ या उससे ज्यादा थी। प्लान यह था कि फ्लैट किराए पर लेकर, कब्जा करके, फर्जी दस्तावेजों से उसे अपने या सिमरन के नाम ट्रांसफर कर दिया जाए और फिर बेचकर पैसा कमाया जाए।’ अनुज टिक्कू की हत्या वाले दिन किया था एक प्रोड्यूसर का कत्ल
अरुण टिक्कू हत्याकांड के कबूलनामे के बाद विजय ने पुलिस बयान में एक और हत्याकांड का भी खुलासा किया, जिसे उसने 7 अप्रैल को ही अंजाम दिया था। दरअसल, 5 अप्रैल को पुलिस को प्रोड्यूसर करण कक्कड़ के गुमशुदा होने की शिकायत मिली थी, जिनकी तलाश जारी थी।
करण कक्कड़ एक अमीर बिजनेसमैन थे, जो फिल्मों में पैसे लगाना चाहते थे। इसकी खबर लगते ही सिमरन ने उन्हें टारगेट कर नजदीकियां बढ़ाना शुरू कर दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि वो करण को बतौर प्रोड्यूसर एक फिल्म से जोड़ेंगी। 5 अप्रैल को मीटिंग का झांसा देकर सिमरन और विजय पालांडे उन्हें किराए के एक फ्लैट में ले गए और बंदी बना लिया। दोनों ने करण के अकाउंट से पैसे निकाले और क्रेडिट कार्ड से लाखों की शॉपिंग की।
पूरे पैसे निकालने के बाद 7 अप्रैल को दोनों ने मिलकर करण कक्कड़ की गला काटकर हत्या कर दी। पुलिस बयान में विजय ने बताया कि हत्या से पहले उन्होंने करण कक्कड़ से पूछा कि उनका गला होश में काटा जाए या वो नींद की गोलियां खाना चाहेंगे। करण के कहने पर दोनों ने उन्हें 14 नींद की गोलियां खिलाईं और फिर बाथरूम में उनका गला काट दिया। दोनों ने लाश के टुकड़े किए और फिर उसे कुंभरली घाट में फेंक दिया। विजय की निशानदेही में पुलिस ने कुंभरली घाट से करण का कंकाल बरामद किया।
जब पुलिस ने सिमरन और विजय के जॉइंट बैंक लॉकर की जांच की तो उन्हें वहां अनुज टिक्कू का एक सुसाइड नोट भी मिला।
नोट में अनुज की हैंडराइटिंग में उनके सिग्नेचर के साथ लिखा गया था- “I, Anuj Tiku, am not happy with my life and I want to leave my body and go towards moksha. Nobody should be responsible for my death.” (“मैं अनुज टिक्कू अपने जीवन से निराश हूं और अपनी देह छोड़कर मोक्ष की ओर जाना चाहता हूं। मेरी मौत का कोई जिम्मेदार नहीं है।”)
विजय ने बताया कि वो अनुज की हत्या के बाद ये सुसाइड नोट जारी करते, जिससे सबको लगता कि पिता की हत्या के बाद उन्होंने सुसाइड कर लिया है।
दैनिक भास्कर से बातचीत में अनुज टिक्कू कहते हैं, ‘इनका प्लान था पहले मुझे मारना और फिर मेरे पिता को। लेकिन पापा के अचानक आ जाने से प्लान बदलना पड़ा। उस समय मेरी हालत ये थी कि मैं थोड़ा बहुत डोप लेता था। ये बात 6 तारीख की रात से कुछ दिन पहले की है। एक दिन उन्होंने मुझे बीयर पिलाई गई, जिसमें नशीली दवा मिलाई थी। मैं कभी बीयर पीकर उल्टी नहीं करता, लेकिन उस दिन मैंने उल्टी की, जबकि मैंने आधी बोतल से ज्यादा नहीं पी थी। वहीं उन्होंने नशे में मेरा हाथ पकड़कर वो लेटर लिखवाया। अगर कोई सच में डिप्रेस्ड होकर सुसाइड नोट लिखता, तो वो कमरे में कहीं पड़ा होता, बैंक लॉकर में क्यों मिलता?’
हीरोइन बनने के लिए मुंबई आईं थीं सिमरन फिर गैंगस्टर से बनी जोड़ी
1995 में सिमरन सूद एक डांस कॉम्पिटिशन के लिए मुंबई आई थीं। वो ये कॉम्पिटिशन तो नहीं जीतीं, लेकिन मॉडलिंग के प्रोजेक्ट्स मिलने के बाद वो मुंबई में ही रहने लगीं।
एक पेज-3 पार्टी में सिमरन की मुलाकात विजय पालांडे से हुई और समय के साथ दोनों रिलेशनशिप में आ गए। विजय पालांडे से मुलाकात के बाद सिमरन की जिंदगी में लग्जरी की कोई कमी नहीं थी। वो अपनी ज्यादातर कमाई सिमरन पर खर्च करता था। उसकी कमाई का जरिया थी लूट और दो नंबर के काम।
सिमरन ने उस समय कई प्लास्टिक सर्जरी करवाईं। साल 1997 में सिमरन ने बिजनेसमैन कहते हुए विजय की मुलाकात पेरेंट्स से करवाई और शादी की बात की। परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था, लेकिन इसके बावजूद दोनों ने 1997 में शादी कर ली।
समय के साथ सिमरन भी विजय के प्लान्स में शामिल होने लगीं।
डबल मर्डर केस में सिमरन बनीं भागीदार
1998 में विजय पालांडे मुंबई के कॉपर चिमनी रेस्टोरेंट में काम करता था। यहां उसने देखा कि अनूप दास अक्सर रेस्टोरेंट में आते हैं। अनूप एयर इंडिया के इंजीनियर थे, जिन्हें विजय ने टारगेट बनाया। प्लान के तहत विजय ने पहले खुद अनूप से दोस्ती की और फिर सिमरन को बहन बताते हुए उनसे मुलाकात करवाई। सिमरन ने उनसे जल्द ही नजदीकियां बढ़ा लीं, जिससे उनका घर आना-जाना भी बढ़ गया। अनूप के परिवार वाले भी सिमरन से परिचित थे।
विजय जानता था कि अनूप की जुहू में प्रॉपर्टी है, जिसपर उनकी नजरें थीं। सिमरन ने एक रोज अनूप से कहा कि उनके पास मुंबई में रहने के लिए घर नहीं है, तो उसने अपना फ्लैट सिमरन को रहने दे दिया। सिमरन उस फ्लैट में विजय पालांडे के साथ रहने लगीं।
फ्लैट मिलने के बाद सिमरन और विजय ने अनूप की हत्या की साजिश रची। 26 जनवरी 1998 को दोनों ने अनूप को एक बिजनेस मीटिंग के लिए महाबलेश्वर बुलाया था। अनूप बिना किसी को बताए महाबलेश्वर निकले, लेकिन इसके बाद से ही उनकी कोई खबर नहीं मिली। सिमरन और विजय ने उनका महाबलेश्वर के रास्ते में ही कत्ल कर उनकी लाश ठिकाने लगा थी।
अनूप दास के पिता स्वराज रंजन ने बेटे के बारे में पता करने के लिए जब विजय पालांडे को कॉल किया तो जवाब मिला कि अनूप उनके साथ हैं, कुछ दिनों में लौट आएंगे।
करीब एक हफ्ते बाद भी जब अनूप नहीं लौटे, तो स्वराज ने फिर विजय को कॉल किया। इस बार विजय ने कहा कि अनूप उनसे मिलना चाहते हैं और उन्हें महाबलेश्वर बुला रहे हैं। सिमरन और विजय का अनूप के घर में इस कदर आना-जाना था कि उनपर कभी किसी को शक नहीं हुआ।
विजय से बात करने के तुरंत बाद ही स्वराज रंजन महाबलेश्वर पहुंचे। तब विजय और सिमरन ने बेटे से मिलने के बदले 7 लाख रुपए की डिमांड रख दी। स्वराज ने उन्हें 7 लाख ट्रांसफर भी किए, लेकिन दोनों ने इसके तुरंत बाद उनका भी कत्ल कर दिया।
स्वराज रंजन की पत्नी ने उनकी और बेटे की मिसिंग कंप्लेंट दर्ज करवाई थी। जिसकी जांच में विजय पालांडे और सिमरन की गिरफ्तारी हुई। विजय पालांडे ने पुलिस कस्टडी में जुर्म कबूल कर लिया। उन्हें इस केस में उम्रकैद की सजा हुई, जबकि सिमरन को कुछ महीनों बाद ही छोड़ दिया गया था।
विजय पालांडे 2 सालों तक जेल में रहा, लेकिन फिर पेरोल से भाग निकला। विजय से अलग होने के बाद सिमरन सूद फिर मॉडलिंग और एक्टिंग करियर में व्यस्त हो गईं। लेकिन 2005 में विजय ने फिर उनसे संपर्क किया। विजय पेरोल से भागने के बाद दुबई जाकर छिप गया। वहां उसने प्लास्टिक सर्जरी के जरिए हुलिया बदल लिया और फिर मुंबई आ गया। सिमरन स्ट्रगल करते हुए चंद रुपयों में गुजारा कर तंग आ चुकी थीं। ऐसे में विजय के लौटते ही उन्होंने फिर उसका साथ दिया।
बिजनेसमैन गौतम वोरा की भी हत्या की रची साजिश
विजय के मुंबई लौटते ही सिमरन ने 2005 में बिजनेसमैन गौतम वोरा को अपना अगला टारगेट बनाया। सिमरन ने गौतम को शादी के लिए राजी किया। प्लान था कि शादी के बाद सिमरन और विजय गौतम का कत्ल करेंगे, जिससे गौतम की सारी प्रॉपर्टी सिमरन को मिल जाती। हालांकि गौतम की मां इसके खिलाफ थीं, जिससे उनका प्लान टलता जा रहा था। विजय पालांडे ने कबूलनामे में बताया कि अनुज टिक्कू की हत्या के बाद वो गौतम का कत्ल करने वाले थे, लेकिन खुशकिस्मती से समय रहते उनके प्लान का पर्दाफाश हो गया।
इस केस पर क्राइम जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल कहते हैं, सिमरन और विजय के बीच एक बहुत ही गजब और कमाल की केमिस्ट्री और हिस्ट्री थी। जब इन्हें घर किराए पर लेना होता था तो ये खुद को पति‑पत्नी बताते थे। और जब इन्हें खुद को मार्केट में प्लेस करना होता था, तो विजय पालांडे सिमरन को अलग‑अलग नामों से कभी सीमा, कभी किसी और नाम से अपनी बहन के रूप में इंट्रोड्यूस करता था। ये दोनों मिलकर बहुत सारे लोगों को ठग चुके थे और उनकी प्रॉपर्टीज हड़पने की योजनाएं बनाते थे। इसी सिलसिले में इनकी मुलाकात टिक्कू साहब के बेटे अनुज से हुई।
इनके नेक्सस को कम से कम दस साल हो चुके थे। इनके टारगेट ज्यादातर फिल्म, एंटरटेनमेंट, मॉडलिंग और फैशन इंडस्ट्री से जुड़े लोग होते थे जो वल्नरेबल होते हैं और आसानी से भरोसा कर लेते हैं। मेरी जानकारी के मुताबिक, अगर यह केस 2012 का है, तो इनका नेक्सस कम से कम दस साल या उससे भी ज्यादा पुराना था। ये लोग एक दशक से ज्यादा समय से इसी तरह की हरकतें कर रहे थे। इनका जो टार्गेटेड एरिया और टार्गेटेड पर्सन होते थे, वो ज्यादातर फिल्म इंडस्ट्री, एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री, मॉडलिंग और फैशन से जुड़े लोग होते थे। अगर आपके सामने एक खूबसूरत लड़की बहन, पत्नी या प्रेमिका बनकर बैठी हो, तो कोई भी आसानी से भरोसा कर लेता है। इसी भरोसे का ये लोग फायदा उठाते थे।
14 सालों से जेल में है विजय पालांडे, सजा-ए-मौत की हुई मांग
1998 के डबल मर्डर, प्रोड्यसूर करण कक्कड़ और अरुण टिक्कू की मौत के आरोप में विजय पालांडे आज भी जेल में बंद है। उसके साथी धनंजय शिंदे और मनोज गजकोश भी जेल में हैं, हालांकि सिमरन को 3 साल की सजा के बाद छोड़ दिया गया है।
अनुज कहते हैं, मुझे खुशी इस बात की है कि उज्जवल निगम 14 सालों से हमारा केस लड़ रहे हैं। वो डेथ पेनाल्टी की मांग कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि विजय पालांडे को डेथ पेनल्टी मिलेगी और तभी मुझे लगेगा कि मेरे पिता को इंसाफ मिला है।
केस पर क्राइम जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल कहते हैं, यह पूरा मामला एक सुनियोजित साजिश का उदाहरण है, जिसमें सिस्टम की कमजोरियां भी साफ नजर आती हैं। सबसे दुखद पहलू यही है कि इतने सबूत, गवाह और डॉक्यूमेंटेशन होने के बावजूद, सालों बाद भी मिस्टर टिक्कू और अनुज टिक्कू को पूरा न्याय नहीं मिल पाया। यह केस सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
(नोटः ये खबर एक्टर अनुज टिक्कू और मशहूर क्राइम जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल के इंटरव्यू और रिसर्च के आधार पर लिखी गई है।)
लेखक- ईफत कुरैशी
रिपोर्टर- वर्षा राय
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